मुग्लिस्तान ,एक दीर्घकालिक साजिश का मकसद
" भारत में विभाजन की नींव उसी वक़्त पड़ गयी थी । जब भारत का प्रथम हिन्दू इस्लाम में दीक्षित हुआ था ।"-----मोहम्मद अली जिन्ना (१९४७ बंटवारे के वक़्त )
"भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है क्योंकि यहाँ हिन्दू बहुसंख्यक हैं जिस दिन भारत में हम मुसलमान बहुसंख्यक हो जायेंगे उस दिन एक क्रांति के द्वारा एक नया मुस्लिम राष्ट्र बनेगा,क्योंकि हम मुसलमान कभी धर्मनिरपेक्ष नहीं होते । " ……. इमाम बुखारी (जामा मस्जिद नई दिल्ली )
क्या आपने कभी मस्जिद से चलने वाले भड़काऊ भाषणों के टेप सुने हैं ,अगर हाँ तो अब इन्हें नजरंदाज़ करना ख़तरनाक भी हो सकता है ।क्योंकि मस्जिदों में मुसलमानों से कहा जाता है कि ,अपने आसपास कमसेकम दस मुसलामानों को बसाओ ,जितना हो सके उनकी मदद करो ,ज्यादा से ज्यादा शादियाँ करके दस से पंद्रह बच्चे पैदा करो ,ज्यादा से ज्यादा आबादी बढाओ ,खरीदारी केवल मुसलामानों से ही करो ,इससे इस्लाम ताक़तवर बनेगा और ऐसा तबतक करो जब तक पूरी दुनियाँ पर इस्लाम का राज़ न हो जाये ।
आज हम सभी हिन्दु अच्छी तरह से जानतें हैं कि हमारे देश में बहुत से अवैध प्रवासी मुसलमान रह रहे हैं । इनकी तादाद करोड़ों में है ,इनमें से कुछ बांग्लादेशी घुसपैठिये हैं और कुछ म्मयार से खदेड़े गये रोहिंग्याई मुसलमान हैं । इन्हें हमारे देश की मौज़ूदा सरकार का मौन समर्थन भी मिला हुआ है । बाहर से आने वाले ज्यादातर मुसलमान यातो कूड़ा बीनने का व्यसाय करते हैं या कबाड़ का कारोबार करते हैं । इनके परिवारों के चार छः लोग मिल कर दिन भर में इतनी पोलिथिन और प्लास्टिक जमा कर लेते हैं कि वो सब मिला कर हजार रुपयों में बिक जाता है । आप ख़ुद समझ सकते हैं कि ये कितनी जल्दी आर्थिक रूप से मजबूत हो जाते हैं और ज़िहाद के नाम पे चंदा देने लायक हो जाते हैं । ये कहीं भी खाली पड़ी जमीन पर झुग्गियाँ बना के रहने लगते हैं और उस जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर लेते हैं । असली समस्या तब आती है जब इनका कोई मर जाता है ,ये चुपके से उसकी लाश को किसी खाली पड़ी जमीन में दफना देते हैं और वहां वक्फ़बोर्ड लिख के टांग देते हैं।भारत में आधिकारिक रूप से ३३ करोड़ मुसलमान रहते है ,लेकिन हकीकत ये है कि भारत में इस वक़्त ४० से ४५ करोड़ मुसलमान रह रहे हैं।
अगर बीते हुए वक़्त पे गौर करें पायेंगे कि तीस सालों में मुसलामानों की आबादी ८ से १२ गुनी हो जाती है । इसका एक बहुत डरावना मतलब भी है ,वो ये है की ,
आज से तीस साल बाद भारत एक मुसलिम बहुसंख्यक देश हो जायेगा ।
और उस वक़्त मुसलमान भारत को एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देंगें ,आप ख़ुद भी समझ सकते हैं कि ,वो वक़्त कितना भयानक होगा ।
और उस वक़्त आज की युवा पीढ़ी बुजुर्ग होगी ,और हमारी तीसरी पीढ़ी यानि हमारे पोते पोतियों की पीढ़ी जन्म ले चुकी होगी । जीवन में आराम के पड़ाव पर अपनी आँख के सामने अपने बीवी बच्चों और फूल से प्यारे मासूम पोते पोतियों को कटते हुए देखना बहुत कष्टकारी होगा । उस वक़्त हम बिलकुल बेबस होंगे ,उस वक़्त हम कुछ भी नहीं कर पायेंगे ,जो कुछ हो सकता है आज के दौर में ही हो सकता है ।
आपने अक्सर फेसबुक पे दी गयी टिप्णियों में मुग्लिस्तान का जिक्र जरुर देखा होगा ,उस तथाकथित मुस्लिम बहुसंख्यक राष्ट्र का नाम होगा "मुगालिस्तान "। इसके पीछे मुसलामानों का तर्क है कि ,मुगलों ने इस मुल्क पे ८०० सालों तक हुकुमत की है । ये मुसलामानों की अपनी सोच है ,हमें सिर्फ़ ये देखना है कि अपने देश को मुसलिम बहुसंख्यक बनने से कैसे बचाना है । चाहे कश्मीर हो चाहे आसाम हो या चाहे केरल हो मुसलमानों ने हमेशा एक जैसा ही बर्ताव किया है पहले अपनी आबादी को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाया ,फिर मंदिरों और अन्य गैरमुस्लिम धार्मिक स्थलों को नष्ट करना शुरू कर दिया,और आखिरकर हिन्दुओं और अन्य गैरमुस्लिमों को यातो खदेड़ दिया या काट दिया । हम हिन्दुओं के पास अब ज्यादा वक़्त नहीं बचा है,हमें जो भी करना है आज के दौर में ही करना होगा ।
सबसे पहले मैं मुग्लिस्तान की रूपरेखा के बारे बताना चाहूँगा ,१९४७ में बँटवारे के वक़्त दो देश बने थे ,भारत हिन्दुओं के लिये और पकिस्तान मुस्लिमों के लिये । पकिस्तान दो हिस्सों में बटा था पूर्वी पकिस्तान (जो आज बांग्लादेश है ) और पश्छिमी पाकिस्तान (मौज़ूदा पाकिस्तान )। १९७१ में बांग्लादेश लिबरेशन वार के चलते बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित हुआ । १९४७ के दौरान मुसलमान पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच के सारे क्षेत्र को मिला कर एक संयुक्त मुस्लिम राष्ट्र चाहते थे , और अब फिर से चाहने लगे हैं । लेकिन इस बार वो ज्यादा से ज्यादा जमीन घेरना चाहते हैं ,जो कि एक चिंता का विषय है ।

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